शिक्षण प्रशिक्षण दिन(29-33)

 दिन -29

आज मुझे आठवीं कक्षा में जाना था। आज मैं 'बात उसे मंगलवार की ' नामक पाठ सिखाया ।आज कक्षा निरीक्षण के लिए हमारी विभाग अध्यक्ष श्रीमती जयकृष्ण टीचर आई थी ।बच्चों कक्षा में चुप थे। साथ ही कक्षा में ध्यान भी दे रहे थे। प्रश्न पूछने पर सही उत्तर भी दे दी।पूर्ण रूप से हिंदी मैं कक्षा चलाने के कारण कुछ छात्रों को पालन करने में कठिनाई हुई ।मुझे आज पता चला की बहुत कोशिश करने के बाद भी मेरे लिखावट में कोई सुधार  नहीं आए। मुझे ज्यादा प्रयत्न करना पड़ेगा। आज मैं नए शब्द के अर्थ उदाहरण सहित ढंग से नहीं दे पाए ।अपने शिक्षण प्रक्रिया में बहुत सुधार लाना पड़ेगा।

दिन -30

आज मुझे आठवीं कक्षा में तीसरी अवधि में जाना था। आज भी कक्ष निरीक्षक के लिए हमारा विभाग अध्यक्ष श्रीमती जय कृष्णा टीचर आया। आज कक्षा में बच्चे पर्याप्त मात्र कक्षा में शोर मचा रहे थे ।इसलिए मुझे कक्षा  चलने में काफी परेशानी आ गई ।कक्षा में उत्तर देने वाले बच्चे भी उपस्थित नहीं थे। इसलिए मुझे आसानी से कक्षा चलाना नहीं पड़ा। मैं अच्छी तरीके से तैयार नहीं किया इसलिए प्रश्नपूछने और व्याख्या करने में परेशानी हुई है। साथ ही गिनती करने में मैं भूल थोड़ा तनाव भी था ।इसलिए सब कुछ उल्टा कर दिया।

दिन -31

आज मुझे छात्रों को निदानात्मक परीक्षा देना था। परीक्षा तैयार करने के लिए बहुत मेहनत करना पड़ा। मैंने बहुत सोच समझ कर बच्चों की काबिलियत के अनुसार प्रश्न तैयार किया।जब मैं परीक्षा के बारे में बोली तब वे बेचैन हो रही थी।लेकिन उन्हें किसी प्रकार संभल पाई ।जब प्रश्न दिया तो बच्चों को विभिन्न प्रकार शंका का उत्पन्न हो गई थी। मैंने सारी शंकाओं को दूर किया ।फिर बच्चे उत्तर लिखने लगे बच्चों बहुत उत्सुकता से उत्तर लिखते थे ।यह देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई ।मुझे पता चला की कक्षा में व्याकरण सीखने से बच्चों की रुचि बढा सकती है ।कथा, कहानी यानी अन्य विद्या को सीखने से बेहतर व्याकरण सीखना ही है। व्याकरण सीखने के लिए बच्चे हमेशा उत्सुक रहे थे।

दिन -32

आज मुझे नवीं कक्षा जाना था हम परीक्षा देने के लिए परीक्षा पत्र तैयार किया। लेकिन छात्र परीक्षा लिखने के लिए तैयार था।नवीं कक्षाके बच्चे बहुत शोर मचा रहे थे उन्हें शांत करने के लिए कम से कम 10 मिनट लग गई। प्रश्न देने के बाद भी पूर्ण तैयार नहीं थे। इसलिए उन्हें परीक्षा मुश्किल लगा ।उस बच्चों ने बहुत प्रश्नों के उत्तर मुझे ही पूछ ली। इस कक्षा में काफी होनहार बच्चे होते हुए भी बिना तैयारी करके आने के कारण भी अच्छी तरह से कक्षा में परीक्षा में लिख पया ।इस बच्चों के ओनर को देखकर मैं प्रश्न पत्र कुछ मुश्किल ढंग से लिखा था। लेकिन  अब लगने लगा कि आसान कर देना चाहिए था।

दिन -33

आज मुझे नवीं कक्षा में जाना था ।शायद आज ही इस कक्ष में मेरी अंतिम दिन होगा। इसलिए मैं कक्षा समापन के बाद विदाई मांग लिया। तब बच्चों ने मिठाई के बारे में पूछा तो मैंने कहा कि मैं अगले दिन बांट लूंगी ।आज 'संसार पुस्तक है' नामक पाठ का अध्ययन करवाया। बहुत दिनों के बाद मैं इस कक्षा में प्रवेश किया। लेकिन बच्चों को पिछले कक्षा खाई भागीदारी था से पता चलता है कि छात्र ध्यान दे रहे हैं । लेकिन मुझे ऐसा लगा कि बच्चों ध्यान दे रहे थे। साथ ही बीच-बीच में प्रश्न भी पूछ रहे थे इससे पता चलता है कि छात्र को कक्षा में रुचि है।

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